Kalpna Chouhan

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ज़िंदगी का सफर - 💞हमसफ़र के साथ💞 "भाग 10"

दर्श ने कार एक घर के सामने रोकी जिसकी नेम प्लेट पर लिखा हुआ था, सिंह विला ।

दर्श ने कार पार्किंग में पार्क की और किआरा, वन्या और उत्कर्ष को लेकर घर के अंदर आ गया जहा दिलीप जी ( किआरा के पापा ), गौरी जी ( किआरा की सौतेली माँ ) और तन्वी ( किआरा की छोटी बहन ) बैठी हुई थी
सभी ने दरबाजे लर किआरा को देखा तो दिलीप जी और तन्वी उठकर जल्दी से किआरा के पास आये और उसके गले लगकर बोले 

दिलीप जी :- किआरा मेरी बच्ची मैने तुम्हे बहुत मिस किया, अब तुम आ गई हो तो आज तो फिर से अपनी पार्टी होगी

किआरा :- यस पापा जरूर होगी पार्टी, और मैने भी आपको बहुत मिस किया 

तन्वी जो साइड में खड़ी थी उसने दर्श को गोद में उत्कर्ष और वन्या को देखा तो उसने उससे वन्या को लिया ओर दोनो के गाल पर किस करते हुए बोली 

तन्वी :- वाओ दी ये दोनो कितने क्यूट है इनको देखकर तो मैं आपको भी भूल गई😊

दिलीप जी ने वन्या और उत्कर्ष को देखा और फिर दोनो से लाड़ लड़ाते हुए तन्वी से बोले 

दिलीप जी :- तन्वी बेटा ये दोनो क्यूट क्यू नही होंगे, आखिर आपने नानू पर जो गये है😜

तन्वी :- नहीं पापा ये नानू पर नहीं मासी पर गये है

दर्श भी उनके बीच कूदते हुये बोला 

दर्श :- ये दोनो ना नानू पर गये है और ना ही मासी पर ये तो अपने हैंडसम मामू पर गये है, सही कहा ना बच्चों

दर्श की बात सुनकर या फिर उन सबका प्यार देखकर नन्हे नन्हे वन्या और उत्कर्ष खिलखिलाकर हस दिये तो सभी उनकी मासूम हसी में खो गये लेकिन उन सभी के कानो में एल कठोर आवाज पड़ी जिसे सुनकर सभी का मूड उखड़ गया, ये आवाज गौरी जी की थी जो किआरा को देखकर बैसे ही चिड़ जाती थी लेकिन आज उसके साथ उत्कर्ष और वन्या को देखकर और भी ज्यादा चिड़ गई थी 

गौरी जी ( गुस्से में ) :- आ गई ये बाँझ, अब मेरे घर पर फिरसे इस बाँझ का साया घूमेगा पटा नहीं अब क्या क्या अनर्थ होगा इस घर में इसके पापी कदम रखने से 😠

गौरी जी की बात सुनकर किआरा के आँशु आ गये, लेकिन दिलीप जी गुस्से से बोले

दिलीप जी :- गौरी आप अगर यहां का माहौल खराब करना चाहती है तो आप यहां से जा सकती है और मेरी बेटी को बाँझ कहने की जुर्रत भी मत कीजियेगा, मेरी बेटी बाँझ नहीं है समझी ( वन्या और उत्कर्ष की तरफ इशारा कर ) देखिये मेरी बेटी के दो दो बच्चे है समझी आप

गौरी जी :- ये दुसरो को बच्चों को अपना बच्चा कहने से कोई अपना सगा नहीं बन जाता समझे आप, ये बाँझ है और बाँझ ही रहेगी, और आप जिन बच्चों की बात कर रहे है ना वो भी इसके सगे नहीं सौतेले है और देखना एक दिन ये भी इससे परेशान होकर छोड़ देंगे और अपना असली रंग दिखाएंगे इसकी तरह, देखना ये भी आगे चलकर तेरी तरह ही मनहूस होंगे 😡

किआरा ने वन्या और उत्कर्ष के लिए गौरी जी से गलत सुना तो उससे बर्दास्त ना हुआ और वो पहली बार गौरी जी के सामने खड़ी होकर बोली 

किआरा :- बस माँ आपको मेरे बारे में जो कहना है कह सकती है मैं कुछ भी नहीं कहूँगी लेकिन अगर आपने मेरे बच्चों के बारे में गलत बोला तो में ये भी भूल जाऊंगी की आप मेरी सौतेली माँ है, वन्या और उत्कर्ष को भले ही मैने जन्म ना दिया हो लेकिन मेरे लिए ये दोनो अपनी जान से भी ज्यादा कीमती है अगर किसी ने इनके ऊपर बुरी नजर डाली तो में उसकी आंखे नोच लूंगी, चाहे फिर आप ही क्यू ना हो, मैं खामोश सिर्फ तब तक हु जब तक बात मुझतक है जैसे ही किसी ने मेरे अपनों के लिए मेरे बच्चों के लिए कुछ गलत कहा तो मैं शांत नहीं रहूंगी 😠

गौरी जी, दिलीप जी, दर्श और तन्वी सभी पहली बार किआरा को गौरी जी को जबाब देते हुए देखकर पहले तो हैरान हुए फिर मन ही मन खुश हुए की चलो किआरा ने बच्चों के लिए ही सही पर आज गौरी जी को जबाब तो दिया जो उसे बचपन से लेकर अब तक सिर्फ कड़वी बाते ही सुनती रही कभी प्यार के दो मीठे बोल भी ना बोले होगे उन्होंने ।
गौरी जी भी किआरा को अपने सामने पहली बार बोलते हुए देखकर हैरान हो गई फिर मुह बना कर अपने कमरे में बड़बड़ करते हुए चली गई 

गौरी जी ( बड़बड़ाते हुए ) :- इस लड़की की शादी हुए अभी 2 दिन नहीं हुए ओर देखो इसके भी पर निकल आये है देखो तो अब मुझसे जवान लड़ा रही है इसकी अकल ठिकाने लाना ही पड़ेगा😠😏

गौरी जी के जाने के बाद दिलीप जी ने किआरा के सर पर हाथ फेरा ओर बोले 

दिलीप जी :- शाबाश बेटा, आज पहली बार तुमने भले ही अपने लिए ना सही अपने बच्चों के लिए स्टैंड लिया, मैं भी यही चाहता था की तुम अपने लिए स्टैंड लो लेकिन सच कहते है लोग एक लड़की माँ बनने के बाद छिपकली से डरने वाली भी अपने बच्चों के लिए शेर का सामना भी कर सकती है, और आज तुम सचमे एक माँ बन गई हो तभी तो आज तक चुप खामोश रहने वाली लड़की ने आज अपनी खामोशी तोड़ दी, आय एम प्राउड ऑफ यू बच्चा 😊

दर्श :- यस पापा आपने सही कहा किआरा दी भले ही हमसे बड़ी है लेकिन कितनी बार मैने तन्वी ने दी को समझाया की वो माँ की बातो का जबाब दे पर नहीं दिया कभी और आज, हमे भी आप पर प्राउड है दी

तन्वी ने भी हा में सर हिलाया और दिलीप जी फिर बोले

दिलीप जी :- बेटा मुझसे प्रॉमिस करो की तुम कभी वन्या और उत्कर्ष को माँ की कमी महसूस नहीं होने दोगी, जैसे तुम माँ के प्यार के लिए हमेशा तरसी हो कभी इनके साथ ऐसा नहीं करोगी, अगर तुमने इनके साथ ऐसा किया तो तुम भूल जाना की मै तुम्हारा पिता हु

किआरा :- नहीं पापा ऐसा मत कहिये आप जानते है आप मेरे लिए सब कुछ है और रही बात वन्या और उत्कर्ष की तो आप ना भी बोलते तब भी मैं उन्हे कभी माँ की कमी महसूस नहीं होने दूंगी अपनी जान से ज्यादा संभाल कर रखूंगी इन्हे 

दिलीप जी :- गुड मेरा बच्चा 

तन्वी ( माहौल हल्का करते हुए ) :- चलो अब ये सेंटी बाते छोड़ो और पापा आप क्या दी और अपने नाति को दरवाजे पर ही खड़ा रखोगे या अंदर भी ले जाओगे, चलो चलो दी अंदर चलो देखो पापा ने आपके लिए क्या क्या बनाया है 

सभी अंदर जाकर सोफे पर बैठे ही थे की तभी उन्हे दरवाजे पर से आवाज आई, सभी ने पलटकर देखा तो हैरान के साथ साथ घबरा भी गये 








To be continued.................

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10 Comments

Prashant Chouhan

11-Nov-2022 06:14 PM

Nice chapter 😍

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Miss Chouhan

11-Nov-2022 11:19 AM

Nice story😊😊😊

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Abeer

17-Oct-2022 12:33 PM

Very nice

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